सहरसा-पूर्णिया राष्ट्रीय राजमार्ग 107 को अधिग्रहित की जा रही जमीन के मुआवजे को लेकर रैयतों में भारी आक्रोश है। मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग को लेकर रैयतों ने सरकार व अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलने का मन बना लिया है। यहां तक कि आक्रोशित रैयत गण ने आत्मदाह करने तक कि चेतावनी दे डाली।
मामला मुरलीगंज प्रखंड क्षेत्र के मीरगंज से बायपास निकलने वाले भूमि अधिग्रहण में मौजा घाघा, नपं मुरलीगंज वार्ड 1 में किये गए अधिग्रहण की दर निबंधन कार्यालय में तय किये गए दर से कम कर उचित मुआवजा नहीं मिलने के संबंध में है।
जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिलने को लेकर बिनोद यादव, मो. हबीब, महेश कुमार, विजय कुमार भगत, मो. सौहेल, संतोष कुमार के साथ दर्जनों रैयत धारियों ने आयुक्त सहरसा को आवेदन दिया है। आवेदन में भू-स्वामियों ने अधिग्रहण के लिए ली जा रही जमीन के लिए निर्धारित की गयी रकम से कम राशि देने का आरोप लगाया है।
इनलोगों का कहना है कि भूमि के रैयत गण को समाहरणालय मधेपुरा जिला भुअर्जन कार्यालय मधेपुरा द्वारा निर्गत नोटिश से ज्ञात होता है कि रैयतों की भूमि का मुआवजा लेने का जो नोटिश प्राप्त हुआ है।
उनलोगों ने आरोप लगाया कि भू अर्जन कार्यालय मधेपुरा द्वारा आवासीय भूमि का दर दो लाख 94,000 प्रति डिसमिल के दर से निबंधन कार्यालय में तय है परंतु भू अर्जन कार्यालय मधेपुरा के द्वारा आवासीय भूमि को छिपाकर विकासशील भूमि के श्रेणी में डाल 14775 प्रति डिसमिल से भुगतान करने का नोटिश निर्गत किया गया।
जबकि विकाशशील भूमि का निबंधन कार्यालय मधेपुरा में दर 85 हजार प्रति डिसमिल तय है। इस प्रकार अधिग्रहण की गई भूमि का जो दर भू अर्जन पदाधिकारी, मधेपुरा द्वारा आवासीय, गैर आवासीय, विकसित एवं विकाशशील भूमि का भुगतान की जाने वाली दर वर्तमान सरकारी दर से बहुत ही कम कर भुगतान किया जा रहा है, जो बिल्कुल अवैधानिक है।
उनलोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि हमलोगों को उचित मुआवजा नहीं मिला तो हमलोग आमरण अनशन और आत्म दाह करने को लेकर बाध्य हो जाएंगे।






