सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुरलीगंज में पिछले कई वर्षों से एंबुलेंस सेवा की कमी खल रही है। मरीजों को आपातकालीन सेवा के लिए जहां निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है, वहीं सरकारी एंबुलेंस के लिए घंटों तक इंतजार करना होता है। बिना एंबुलेंस के कई बार मरीजों की जिंदगी दांव पर लगी रहती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भले ही सुविधाओं का दम भरा जा रहा हो, लेकिन यहां पर जीवनरक्षक सेवाओं में कारगर साबित होने वाली एंबुलेंस सेवाएं भी लचर हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुरलीगंज में चिकित्सक, नर्स एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को अभाव परेशानी का सबब बन रहा है। सरकारी अस्पताल के लचर स्वास्थ्य सेवा के अलावा सबसे बड़ी गंभीर समस्या एम्बुलेंस की है। 17 पंचायत के लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मात्र एक एम्बुलेंस है, वो भी खटारा हीं है। जो आबादी के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। अस्पताल का हाल यह है कि जब किसी मरीज को रेफर किया जाता है तो एम्बुलेंस के लिए घंटो इंतज़ार करना पड़ता है।
एम्बुलेंस की हालत यह है कि किसी तरह मरम्मत कर के काम चलाया जा रहा है। करीब तीन लाख की आबादी वाले प्रखंड के लिए एक एंबुलेंस ही उपलब्ध है। एक ही एंबुलेंस उपलब्ध होने के कारण मरीजों को अस्पताल तक लाने मे दिक्कत होती है। विदित हो की मुरलीगंज प्रखंड की बड़ी आबादी गरीबी रेखा के नीचे है। ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही मरीज इलाज के लिए पंहुचते हैं। पुरानी एंबुलेंस होने से गर्भवती महिलाओं को अधिक परेशानी होती है। यहां वर्षों से लोग एंबुलेंस की मांग करते रहे हैं। इसके बाद भी अब तक यहां एंबुलेंस की संख्या नहीं बढ़ाई गई है। प्रखंड से आए दिन एंबुलेंस के अभाव में मरीज के मरने की सूचना आती रहती है। एंबुलेंस के न होने का सीधा असर रोगियों को भुगतना पड़ रहा है।






