नीतीश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है जिसमें कहा गया है कि 2 जून से राज्य में लौटने वाले प्रवासियों का पंजीकरण नहीं किया जाएगा और ना ही क्वारंटिन किया जाएगा ।
सोमवार तक जो लोग राज्य में वापस लौट आए उनका पंजीकरण किया गया, तथा 5000 से अधिक सेंटरों में उन्हें क्वॉरेंटाइन किया गया है जिसमें लगभग 13 लाख से ज्यादा प्रवासी है।
इन क्वारंटिन सेंटरों में बचे हुए प्रवासियों की 14 दिन की क्वॉरेंटाइन अवधि 15 जून तक पूरी हो जाएगी । इसके बाद सभी क्वॉरेंटाइन सेंटर 15 जून के बाद बंद कर दिए जाएंगे ।
इसके अलावा रेलवे स्टेशनों पर थर्मल स्क्रीनिंग को भी बंद करने की तैयारी है लेकिन हर स्टेशन प्राथमिक मेडिकल सुविधा जारी रहेंंगी।
बिहार आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रमुख सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि हमने 30 लाख से अधिक प्रवासियों को वापस लाने की सबसे बड़ी कवायद की है। प्रदेश मे सोमवार शाम से पंजीकरण बंद कर रहे हैं कि यहां के अधिकतम लोग वापस आ गए ।
उन्होंने कहा कि डोर टू डोर स्वास्थ निगरानी जारी रहेगी और चिकित्सा सुविधाएं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेवल वन लेवल टू अस्पतालों तक सामान रहेंगे ।
बिहार सरकार का यह बड़ा फैसला तब लिया गया है जब बिहार में बहुत ही तेजी से कोरोना का संक्रमण फैल रहा हैं। राज्य में अब तक कुल संक्रमितों की संख्या 3945 हो चुका हैं। जिसमें 2745 प्रवासी ही हैं ।






