मुरलीगंज: रेलवे स्टेशन पर पैसेंजर्स के साथ कमाई बढ़ी, विकास थमा

स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का है घोर अभाव

मुरलीगंज/मधेपुरा: रेलवे को लाखों रुपए का राजस्व देने वाला मुरलीगंज रेलवे स्टेशन सुविधाओं का मोहताज है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस स्टेशन की समस्या रेलवे की विकास सूची से गायब है। इसका खामियाजा रेलवे के राजस्व में बढ़ोतरी करने वाले यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। मुरलीगंज रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का घोर अभाव है। यह स्टेशन हमेशा से उपेक्षित रहा है। रेलवे विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच यह स्टेशन अपनी बदहाली पर रो रहा है। यहां अब तक उच्च प्लेटफॉर्म का निर्माण नहीं हो सका है। इससे ट्रेन पर चढ़ने और उतरने में बुजुर्ग, महिलाएं एवं बच्चों को परेशानी होती है। पेयजल एवं शौचालय सुविधा का अभाव है। स्टेशन पर बने शौचालय का उपयोग नहीं हो रहा है जिस वजह से महिलाओं को घोर संकट का सामना करना पड़ता है। पेयजल के लिए मात्र एक हेंडपंप प्लेटफॉर्म पर हैं ऐसी स्थिति में लोग पानी के लिए भटकते नजर आते हैं। मधेपुरा लोकसभा के वर्तमान सांसद दिनेशचंद्र यादव ने प्लेटफार्म ऊँचीकरण एवं अन्य विकास कार्यों की मांग को लेकर रेल मंत्री को पत्र दिया था। लेकिन संसद के प्रयास के बावजूद भी स्टेशन का विकास नहीं हो पाया।

प्लेटफॉर्म नीचे रहने से हो रही परेशानी:

मुरलीगंज स्टेशन का दोनों प्लेटफार्म नीचे रहने के कारण सीनियर सिटीजन, महिला एवं छोटे-छोटे बच्चे को गाड़ी पर चढ़ने उतरने में काफी परेशानी होती है, ऐसी परिस्थिति में मुरलीगंज रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म को ऊंचीकरण कराना जनहित में अति आवश्यक है। ज्ञात हो कि रेलवे स्टेशन से सहरसा, मधेपुरा एवं पूर्णिया, अमृतसर, पटना, गया एवं अन्य जगहों के लिए दैनिक रेल यात्री काफी संख्या में सफर करते हैं। यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने उतरने में काफी परेशानी होती है। कई बार ट्रैन पर चढ़ने के दौरान यहां घटना भी घट चुकी है। बावजूद इसके इस दिशा में रेलवे द्वारा कार्य नहीं किया जाना खतरनाक साबित हो रहा है।

शौचालय व पेयजल की नहीं है व्यवस्था:

स्टेशन पर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं रहने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। चिलचिलाती धूप व गर्मी से परेशान यात्री पानी पीने के लिए तरसते हैं। प्लेटफार्म नंबर एक पर एक हैंडपंप है बस उसी से किसी तरह से काम चलाया जा रहा है। वहीं शौचालय का भी घोर अभाव है। हाल के दिनों में एक शौचालय का निर्माण हुआ भी तो वो चालू नहीं किया गया है। खासकर महिलाओं को शौचालय जाने में दिक्कतें आती है।

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