वट सावित्री व्रत :पति के दीर्घायु होने के लिए महिलाओं ने उत्‍साह के साथ किया पूजन

पति के दीर्घायु होने की कामना को लेकर मनाया जाने वाला पर्व वट सावित्री देश में पारम्परिक तरीके से मनाया गया। अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए यह व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को रखा जाता है। इस साल 22 मई को वट सावित्री व्रत मनाया गया।

कोरोना वायरस के लगातार प्रकोप के कारण इस साल सुहागिन महिलाए घर या आस-पड़ोस के बरगद के पेड़ के नीचे सोशल डिस्‍टेंसिंग का ख्‍याल रखते हुए श्रद्धा व भक्ति भाव के साथ तथा सोलह श्रृंगार कर पूजा-अर्चना की।

बिहार में वट सावित्री व्रत बहुत ही धूमघाम से मनाया जाता हे, लेकिन कोरोना के कारण इस बार महिलाएं अपने घर में ही मनायी । मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड के हरिद्वार चौक, मिड्ल चौक, ,जोरगामा मीरगंज, रामपुर आदि जगहों पर पूरी उत्‍साह से मनाया गया । पति के प्‍यार के लिए रखा गया यह व्रत कोरोना के संकट में भी महिलाओं का उत्‍साह  कम नहीं कर पाया।

वट सावित्री व्रत के मान्‍यताएं :-

धार्मिक मान्यता अनुसार जो व्रती सच्चे मन से इस व्रत को करती हैं उनके पति को लंबी आयु प्राप्त होती है तथा उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं ।इस दिन माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और श्रद्धा से यमराज द्वारा अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस पाए। वट का मतलब होता है बरगद का पेड. बरगद एक विशाल पेड़ होता है. इसमें कई जटाएं निकली होती हैं। कहा जाता है कि इसी पेड़ के नीचे सावित्री ने अपने पति को यमराज से वापस पाया था।

सावित्री को देवी का रूप माना जाता है. हिंदू पुराण में बरगद के पेड़े में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास बताया जाता है। पारंपरिक मान्यताओं  के अनुसार ब्रह्मा वृक्ष की जड़ में, विष्णु इसके तने में और शि‍व उपरी भाग में रहते हैं। इसी वजह है से माना जाता है कि वट पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है।

महिलाओं के लिए ये व्रत बेहद ही फलदायी माना जाता है। इस दिन सुहागन महिलाएं पूरा श्रृंगार कर बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं।

वट सावित्री पूजा विधी :-

 वट सावित्री के अवसर पर सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पीले रंग के धागे को वटवृक्ष में बांधती है और इसी क्रम में वटवृक्ष की परिक्रमा भी हो जाती है। वहीं पांच प्रकार के फूल तथा फल आम, लीची, हल्दी, चंदन, कुमकुम, धूप, अगरबत्ती,बांस के पंखा इत्यादि पूजन सामग्री से सजाकर महिलाएं पूजा अर्चना करती है। वहीं पूजा के बाद वट सावित्री कथा भी सुनी जाती है। महिलाएं वट वृक्ष से अपने पति और संतान की लंबी उम्र की प्रार्थना की।

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