मुरलीगंज:सरकारी विद्यालयों में हड़ताल का दिखा खासा असर

मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत सभी सरकारी विद्यालयों में हड़ताल का खासा असर देखने को मिल रहा है। सभी विद्यालय बंद है एवं मध्याहन भोजन योजना भी बंद है।

प्रत्येक दिन शिक्षकों की बैठक आयोजित हो रही। बुधवार को बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति प्रखंड इकाई मुरलीगंज की बैठक मध्य विद्यालय पड़वा नवटोल के परिसर में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भूपेंद्र यादव ने किया।

अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में शिक्षा के बगैर मनुष्य पशु के समान है। सरकार डिजिटल इंडिया की बात करते हैं मगर शिक्षा देने वाली शिक्षक, शिक्षिका की समस्याएं कोई पदाधिकारी या राज्य सरकार सुनती ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों के प्रति शिक्षा मंत्री और राज्य सरकार नकारात्मक सोच रखती है। वे कहते हैं कि मैट्रिक परीक्षा के समय हड़ताल नहीं करना चाहिए तो आखिर कब करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार व शिक्षा मंत्री का कहना है कि परीक्षा की अधिसूचना पहले ही हो गई थी। तो हमलोग ध्यानाकृष्ट करते हुए उन्हें बताना चाहते हैं क्या 5 सितंबर 2019 के समय सरकार को नहीं चेताया गया था कि हमारी मांगों पर विचार किया जाए।

आंदोलन से भयभीत बिहार सरकार और शिक्षा विभाग के अधिकारी आंदोलनकारी शिक्षकों को डराने धमकाने तथा आंदोलन को कमजोर करने के लिए शिक्षकों को बर्खास्त करने या आंदोलन में रहने वाले पर एफआईआर दर्ज कराने की धमकियां देते हैं। हड़ताली शिक्षकों पर कार्रवाई करना सरकार का पागलपन है।

बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के मीडिया प्रभारी ने कहा कि सूबे की सरकार तानाशाही रवैया अख्तियार कर रही है जबकि सरकार को चाहिए की यथाशीघ्र शिक्षकों की समस्या का समाधान हेतु आदेश जारी करें ।

नियमित शिक्षकों की भांति सेवाशर्त व ससमय वेतन देने में भी सरकार शिक्षकों को उच्च न्यायालय तक घसीट रही है जो कि शर्मनाक है ।

ज्ञात हो शिक्षकों की मुख्य मांगे नियमित शिक्षक की तरह सेवा शर्तें और राज्य कर्मी का दर्जा मिलना, सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष करना, अनुकंपा के आधार पर पूर्व की भांति नियुक्तियां एवं स्थानांतरण जिला संवर्ग के आधार पर होना, पेंशन एवं अन्य योजना का लाभ, उच्च न्यायालय पटना के न्यायादेश को हूबहू लागू करना एवं अन्य है।

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