बिहार के सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों में व्याख्याता की अंतिम नियुक्‍ति पर कोर्ट ने लगाई रोक, BPSC को 15 जून तक रखना होगा अपना पक्ष

बिहार के सरकारी ट्रेनिंग कॉलेजों में लेक्चरर की नियुक्ति लटक गया है। पटना हाइकोर्ट के न्यायाधीश अनिल कुमार उपाध्याय ने फिलहाल अंतिम नियुक्ति पर रोक लगा दी है।

कोर्ट ने इस मामले में बिहार लोक सेवा आयोग को अपना को अपना पक्ष रखने को कहा है। इस संदर्भ में BPSC के संयुक्त सचिव सह परीक्षा नियंत्रक अमरेंद्र कुमार ने बताया कि अभी जो कोर्ट से फैसला आया है। उस पर 15 जून तक काउंटर एफिडेविट फाइल किया जाएगा। इसके बाद कोर्ट का जो फैसला होगा उसका अनुपालन आयोग के तरफ किया जाएगा। इस मामले मे अगली सुनवाई 22 जून को हागी ।

आपको जानकारी के लिए बता दें क‍ि बिहार लोक सेवा आयोग ने विज्ञापन संख्या 2/2016 के तहत 16 विषयों के कुल 478 व्याख्याता नियुक्ति परीक्षा का अंतिम रिजल्ट 27 फरवरी को प्रकाशित किया था।

वैसे अभ्यर्थी जिनका चयन नहीं हो पाया था उनलोगों ने BPSC पर व्यापक गड़बड़ी का आरोप लगाया था। इस रिजल्ट में आयोग ने एक अभ्यर्थी को अलग-अलग विषयों के तीन-तीन पदों के लिए अंतिम रूप से चयनित कर दिया था। ऐसे अभ्यर्थियों की कुल संख्या 6 तथा 109 अभ्यर्थियों को दो-दो विषयों के व्याख्याता पद पर नियुक्त कर दिया है।

 इस तरह BPSC की इस त्रुटि के कारण कई अभ्यार्थियों को व्याख्याता बनने से वंचित रहना पड़ा। इतना ही नहीं आयोग ने जो प्रारंभिक परीक्षा ली थी उस समय भी उसके लेकर कई सवाल उठे थे।

इस मामले मे बता दे क‍ि 16 विषयों के कुल 478 व्याख्याता नियुक्ति अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय सहरसा,भागलपुर, मुजफ्फरपुर, समस्‍तीपुर ,छपरा तथा गया में होना है। अभी इन प्रशिक्षण संंस्‍थाओं में लेक्चरर की भारी कमी हैं।

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