बिहार में कहने को तो शराब पर प्रतिबंध लगा हुआ है, लेकिन राज्य में इससे जुड़े मामले हर दिन सामने आ रहे हैं। वहीं प्रदेश में जहरीली शराब से होने वाली मौतें भी थमने का नाम नहीं ले रही है। मधेपुरा जिला के मुरलीगंज में जहरीली शराब से तीन लोगों की मौत हो गई। जबकि अभी भी 18 से 20 लोगों का विभिन्न अस्पतालों में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से इलाज चल रहा है। नीतीश सरकार ने बिहार में शराबबंदी कानून को सख्त करने के लिए तरह-तरह के दांव पेंच लगाए इसके बावजूद राज्य में इस पर रोक नहीं लग सका। यहां तक ड्रोन के जरिए माफिया और शराब के ठिकानों का पता लगाया जा रहा था। लेकिन नीतीश सरकार ड्रोन उड़ाती रह गई और जहरीली शराब तीन-तीन जिंदगियां निगल गया। हालांकि मृतकों के खास परिजन व पुलिस फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं कर रहे हैं कि मौत का कारण जहरीली शराब है लेकिन मृतकों के रिश्तेदार, आसपास के ग्रामीण व मुरलीगंज पीएचसी और JNKT मेडिकल कॉलेज में भर्ती कई मरीजों ने बयान दिया कि उनलोगों ने होली के दौरान शराब पी थी। इसके बाद ही तबियत खराब होने लगी। बता दें कि पूरे मामले की शुरुआत मुरलीगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत दिगहि गांव से हुई जहां वार्ड दो निवासी लोजपा प्रखंड अध्यक्ष(चिराग गुट) नीरज निशांत सिंह उर्फ बौआ सिंह (40 वर्ष), परोकि सिंह(32 वर्ष) और मुरलीगंज नगर पंचायत के वार्ड 9 निवासी संजीव रमानी (25 वर्ष) की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि जिन तीन लोगों की दो दिन में मौत हुई है, उनमें से किसी का भी पोस्टमार्टम नहीं कराया गया है। चर्चा है कि परिजनों ने पुलिस को लिखकर दे दिया है कि उन्हें शव का पोस्टमार्टम नहीं कराना है।
मुरलीगंज में जहरीली शराब से हुई मौत की सूचना के बाद से इलाके में हड़कंप मचा गया है, जिसके बाद प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है। शनिवार शाम के बाद रात को कई दर्जन फोर्स के साथ मुरलीगंज थाना क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में रातभर पुलिस ने रेड मारा। जबकि रविवार को अलग अलग जगहों से 10 शराब कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया है।






